बूढ़ी औरत और फटा हुआ कपड़ा: छोटी भेंट का बड़ा मूल्य
एक बार बुद्ध के शिष्य आनंद ने उनसे पूछा कि मंदिर और संघ के लिए सबसे बड़ा दान किसका है? बुद्ध ने एक कहानी सुनाई। एक बहुत गरीब बूढ़ी औरत थी जिसके पास पहनने को केवल एक फटा हुआ कपड़ा था। जब उसने बुद्ध के आने की खबर सुनी, तो उसके पास देने के लिए कुछ नहीं था। उसने अपना वही फटा हुआ कपड़ा दान कर दिया और खुद झाड़ियों के पीछे छिप गई।
बुद्ध ने उस फटे कपड़े को सबसे कीमती दान बताया। उन्होंने कहा, “दान की कीमत उसकी राशि में नहीं, बल्कि देने वाले की भावना (चेतना) में होती है।”

