एक मुट्ठी सरसों: दुख की वास्तविकता
किसा गौतमी नाम की एक स्त्री थी जिसका इकलौता पुत्र मर गया था। वह पागलों की तरह अपने मृत बच्चे को लेकर बुद्ध के पास पहुंची और उसे जीवित करने की प्रार्थना करने लगी।
बुद्ध ने उसे शांत किया और कहा, “मैं तुम्हारे पुत्र को जीवित कर दूँगा, बस तुम नगर के किसी ऐसे घर से एक मुट्ठी सरसों ले आओ जहाँ कभी किसी की मृत्यु न हुई हो।” किसा गौतमी घर-घर गई, लेकिन उसे ऐसा एक भी घर नहीं मिला जहाँ किसी ने अपने पिता, माता, भाई या संतान को न खोया हो।
शाम को वह खाली हाथ बुद्ध के पास लौटी। उसका मोह भंग हो चुका था। उसने समझा कि मृत्यु एक अटल सत्य है और शोक करने के बजाय सत्य को स्वीकार करना ही शांति का मार्ग है। हमारा मंदिर ऐसे ही दुखी हृदयों को सांत्वना और मानसिक शक्ति देने का एक केंद्र बनेगा।

